नई दिल्ली:
भारतीय सोने और चांदी के बाजार में तेज गिरावट का दौर जारी है, जिससे फिजिकल बुलियन से लेकर वायदा बाजार तक सभी स्तरों पर भावों में बड़े स्तर पर क्षति दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों में सोना और चांदी दोनों में प्रिय मुनाफावसूली, बजट के असर और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण भारी गिरावट देखने को मिली है।
बजट 2026-27 के दिन जारी किए गए संकेतों के दौरान ही Precious Metals के भाव में तब्दीली आई। चांदी का भाव MCX पर ₹2.65-₹2.74 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर तक गिर गया और सोने का भाव भी लगभग ₹1.43-₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ है।
विशेष रूप से चांदी की कीमत ने पिछले रिकॉर्ड के मुकाबले एक बड़े हिस्से की गिरावट दिखाई है — कुछ सत्रों में यह ₹4,20,000-plus के स्तर से लुढ़ककर ₹2.65-₹2.75 लाख तक आ गई। इसके साथ ही सोना भी वर्षों के उच्च स्तर से करीब ₹16-₹31 हज़ार तक टूटता देखा गया।
व्यापारी और बाजार विश्लेषक बताते हैं कि इस गिरावट के पीछे कई कारक हैं:
- मुनाफावसूली/प्रॉफिट बुकिंग: जब भाव रिकॉर्ड ऊँचाइयों तक पहुँचे, तो निवेशकों ने लाभ सुरक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर बिकवाली की।
- बजट-संबंधित अनिश्चितता: बजट के आस-पास ट्रेडर्स ने अपनी पोज़ीशन को छोटा रखा, जिससे भाव दबाव में आए।
- वैश्विक संकेत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और फेडरल रिज़र्व से जुड़े संकेतों ने भी कीमती धातुओं की मांग में गिरावट लाने में भूमिका निभाई।
- मार्जिन हाइक: CME जैसे प्रमुख एक्सचेंजों पर मार्जिन की बढ़ोतरी ने वायदा बाजार में बुकसेलिंग को बढ़ाया।
इन कारणों की संयुक्त प्रतिक्रिया से धीरे-धीरे बाजार की धारणा भी बदलती दिखी है, जिसका असर भावों पर सीधा पड़ा है।
हालांकि गिरावट के बावजूद सोना और चांदी दोनों की कीमतें अभी भी वर्ष की शुरुआत से जोरदार ऊपर हैं, पिछले उच्च स्तर से नीचे आना निवेशकों के मन में नई अस्थिरता पैदा कर रहा है। वायदा बाजार में चांदी और सोने के ETF तथा फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है।
सर्राफा बाजारों में फिजिकल रेटों में गिरावट के साथ खरीदारों की दिलचस्पी भी बदल रही है — कुछ ग्राहकों के लिए यह खरीदारी का अवसर बन सकता है, जबकि कुछ निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
सेक्टोरल विश्लेषकों के अनुसार, यह गिरावट एक अस्थायी कंसोलिडेशन का हिस्सा हो सकती है, जहां बाजार सुधार की ओर अग्रसर है। कुछ विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर डॉलर की मजबूती और वैश्विक ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहती है, तो सोना-चांदी के भाव में और गिरावट की गुंजाइश हो सकती है। वहीं अन्य का मानना है कि मौजूदा स्तरों से भारी सपोर्ट मिल सकता है यदि निवेश मांग पुनः बढ़े।
बाजार में तेजी से उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सलाहकारों से संपर्क कर अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार कर रहे हैं। फिजिकल खरीदारी करना हो या वायदा, विशेषज्ञ यह सुझाव दे रहे हैं कि लंबे समय के लक्ष्यों और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना आवश्यक है।










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