अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा राजनीति में बड़ा कदम उठाते हुए वेनेजुएला के तेल को लेकर अहम फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति अब केवल अमेरिकी कंपनियों को ही दी जाएगी। इस निर्णय से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है और रूस तथा चीन जैसे देशों के हितों पर सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते वेनेजुएला अपना अधिकांश तेल रूस और चीन को निर्यात कर रहा था। इन देशों ने वेनेजुएला के लिए आर्थिक सहारा भी प्रदान किया था। लेकिन अब अमेरिका द्वारा लाइसेंस नीति में बदलाव के बाद अमेरिकी कंपनियों को प्राथमिकता मिलने से यह समीकरण बदलता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रूस और चीन के तेल टैंकरों की मांग में गिरावट आ सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह फैसला केवल ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी भू-राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है। अमेरिका इस कदम के जरिए एक ओर घरेलू ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वेनेजुएला पर अपना प्रभाव बढ़ाने और रूस-चीन की वैश्विक ऊर्जा पकड़ को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
इस फैसले का असर वैश्विक तेल कीमतों और व्यापारिक संतुलन पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस और चीन इस नीति परिवर्तन पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।











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