लोकसभा में हंगामे ने रोका प्रधानमंत्री का संबोधन, धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब अधूरा

लोकसभा में उस समय भारी राजनीतिक हंगामा देखने को मिला, जब विपक्षी दलों के जोरदार विरोध प्रदर्शन के कारण प्रधानमंत्री अपने संबोधन को पूरा नहीं कर सके। यह स्थिति उस समय बनी जब प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए सदन में खड़े हुए थे।


प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। शोरगुल इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो गया। विपक्ष की मांग थी कि कुछ संवेदनशील और समसामयिक मुद्दों पर पहले चर्चा कराई जाए, जिसके बिना प्रधानमंत्री का जवाब स्वीकार्य नहीं है।


लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन की गरिमा का पालन करने की अपील की। इसके बावजूद विपक्षी सांसद अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी करते रहे। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रधानमंत्री को अपना संबोधन बीच में ही रोकना पड़ा।


धन्यवाद प्रस्ताव राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने का एक अहम अवसर होता है। प्रधानमंत्री के जवाब को इस पूरी बहस का निष्कर्ष माना जाता है, लेकिन हंगामे के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इससे संसदीय कार्यवाही के महत्व और संवाद की परंपरा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।


सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर संसदीय कार्यवाही बाधित कर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रहा है। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार संवेदनशील मुद्दों से बचने के लिए चर्चा से भाग रही है और इसलिए विरोध ही उनके पास एकमात्र रास्ता है।


लगातार हो रहे हंगामे के कारण न केवल महत्वपूर्ण बहसें प्रभावित हो रही हैं, बल्कि विधायी कामकाज भी बाधित हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर संवाद की जगह टकराव हावी रहा, तो संसद की भूमिका केवल शोरगुल तक सीमित रह जाएगी।


सूत्रों के अनुसार, सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के प्रयास किए जा सकते हैं ताकि आगे की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाई जा सके। हालांकि मौजूदा माहौल को देखते हुए यह आसान नहीं दिख रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *