लोकसभा में चीन मुद्दे पर राहुल गांधी का हमला, किरेन रिजिजू की तत्काल आपत्ति से सदन में बढ़ा सियासी ताप

नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026:
केंद्रीय बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर चीन से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति दर्ज कराई और अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की, जिससे सदन का माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।

राहुल गांधी अपने संबोधन के दौरान सरकार की चीन नीति पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े हालात और भारत की रणनीतिक स्थिति पर देश को स्पष्ट जवाब चाहिए। राहुल गांधी का आरोप था कि सरकार इस संवेदनशील विषय पर पारदर्शिता नहीं बरत रही है और संसद को पूरी जानकारी नहीं दी जा रही। उन्होंने इसे सीधे तौर पर राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया।

राहुल गांधी की टिप्पणी पर किरेन रिजिजू ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के बयान सदन की गरिमा और नियमों के खिलाफ हैं, खासकर जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि ऐसे मुद्दों पर बयान देने से पहले तय संसदीय प्रक्रिया और नियमों का पालन किया जाए। रिजिजू ने यह भी कहा कि सरकार हर संवेदनशील विषय पर जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है।

इस दौरान दोनों पक्षों के सांसदों के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने राहुल गांधी के बयान को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया, जबकि विपक्षी सांसदों ने कहा कि सरकार को सवालों से बचने के बजाय जवाब देना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप कर सदन को शांत कराना पड़ा और कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी द्वारा चीन का मुद्दा बार-बार उठाना कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मोर्चे पर घेरना चाहती है। वहीं भाजपा का रुख यह रहा है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर सार्वजनिक बयानबाजी से देश के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

कुल मिलाकर, बजट सत्र के दौरान लोकसभा में यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर चीन, सीमा सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। यह बहस न केवल राजनीतिक, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है।

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