भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय रक्षा खरीद समिति ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इस मेगा डिफेंस डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिससे यह अब तक की सबसे बड़ी रक्षा सौदों में शामिल हो गई है।
सरकार ने इस सौदे को ‘मेक इन इंडिया’ पहल से जोड़ते हुए यह स्पष्ट किया है कि राफेल विमानों का बड़ा हिस्सा देश में ही तैयार किया जाएगा। इसके तहत भारत में जेट निर्माण की सुविधाएं विकसित की जाएंगी और भारतीय कंपनियों को उत्पादन प्रक्रिया में अहम भूमिका मिलेगी। इससे न सिर्फ स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भारतीय वायुसेना लंबे समय से फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी से जूझ रही है। 114 राफेल विमानों की खरीद से वायुसेना की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा। अत्याधुनिक तकनीक, लंबी मारक क्षमता और मल्टी-रोल ऑपरेशन में सक्षम राफेल जेट्स भारत की हवाई सुरक्षा को नई मजबूती देंगे।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस बड़े सौदे के तहत विमानों के उत्पादन और डिलीवरी में 5 से 7 साल का समय लग सकता है। पहले चरण में उत्पादन ढांचा स्थापित किया जाएगा, उसके बाद क्रमिक रूप से विमानों की आपूर्ति शुरू होगी।
हालांकि राफेल जेट फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन द्वारा डिज़ाइन किए गए हैं, लेकिन इस सौदे के जरिए भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है। तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन इस समझौते के अहम हिस्से होंगे।
सरकार का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह सौदा भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू रक्षा निर्माण क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।











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