बजट 2026 के बाद PM मोदी का फोकस ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ पर, जानिए क्या है यह नई आर्थिक सोच और क्यों है खास

नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026:
केंद्रीय बजट 2026 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जिस शब्द ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वह है ‘ऑरेंज इकोनॉमी’। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक ताकत अब केवल पारंपरिक उद्योगों या इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रचनात्मकता, नवाचार, संस्कृति और बौद्धिक संपदा भी देश की ग्रोथ का बड़ा आधार बनेंगी। यही अवधारणा ऑरेंज इकोनॉमी का मूल है।

ऑरेंज इकोनॉमी का मतलब उस आर्थिक व्यवस्था से है, जिसमें क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ को विकास का केंद्र माना जाता है। इसमें फिल्म, म्यूजिक, आर्ट, डिजाइन, फैशन, डिजिटल कंटेंट, गेमिंग, एनीमेशन, मीडिया, विज्ञापन, आर्किटेक्चर, स्टार्टअप्स और कंटेंट क्रिएशन जैसे सेक्टर शामिल होते हैं। इसे “ऑरेंज” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह रंग क्रिएटिविटी, ऊर्जा और नवाचार का प्रतीक माना जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी और उनकी रचनात्मक क्षमता है। आज देश के लाखों युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ओटीटी, यूट्यूब, गेमिंग, डिजाइन और टेक-आधारित क्रिएटिव सेक्टर में वैश्विक पहचान बना रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस क्षमता को सही नीतिगत समर्थन देकर रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाया जाए

बजट 2026 में भले ही ऑरेंज इकोनॉमी शब्द सीधे तौर पर किसी अलग हेड में न हो, लेकिन इसके संकेत कई घोषणाओं में दिखाई देते हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन और इनोवेशन से जुड़े कोर्सेज, तथा MSME और क्रिएटिव इंडस्ट्री के लिए फंडिंग—ये सभी ऑरेंज इकोनॉमी को मजबूत करने की दिशा में कदम माने जा रहे हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, ऑरेंज इकोनॉमी भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कम पूंजी में ज्यादा मूल्य (high value, low capital) पैदा करने की क्षमता होती है। एक क्रिएटर, डिजाइनर या कंटेंट प्रोड्यूसर डिजिटल माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुंच बना सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा आय और भारत की सॉफ्ट पावर दोनों को बढ़ावा मिलता है।

इसके अलावा, ऑरेंज इकोनॉमी परंपरा और तकनीक का संगम भी है। भारत की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, लोक संगीत और योग जैसी विरासत को आधुनिक टेक्नोलॉजी और ग्लोबल मार्केट से जोड़कर नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलें इसी सोच को आगे बढ़ाती हैं।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बजट के बाद ऑरेंज इकोनॉमी का जिक्र यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास कहानी केवल फैक्ट्रियों और सड़कों से नहीं, बल्कि क्रिएटिव माइंड्स, डिजिटल टैलेंट और इनोवेशन से भी लिखी जाएगी। यह नई आर्थिक सोच भारत को वैश्विक क्रिएटिव हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *