देश के कई हिस्सों में इस बार सर्दी समय से पहले ही विदा लेती नजर आ रही है। फरवरी का महीना शुरू होते ही लोगों को गर्मी का अहसास होने लगा है, जिससे मौसम विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। आमतौर पर फरवरी में हल्की ठंड बनी रहती है, लेकिन इस बार तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया जा रहा है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर भारत के कई राज्यों—खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब—में दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर पहुंच चुका है। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी महसूस कर रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) की सक्रियता कमजोर रही। यही वजह है कि उत्तर भारत में ठंडी हवाएं लंबे समय तक नहीं टिक सकीं। इसके अलावा, वैश्विक जलवायु परिवर्तन और एल नीनो जैसे मौसमी प्रभाव भी तापमान बढ़ने के पीछे बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि अगर यही रुझान जारी रहा तो 2026 अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे हीट वेव (लू) की स्थिति समय से पहले बन सकती है।
बढ़ते तापमान का सीधा असर आम जनजीवन पर दिखने लगा है। लोग दिन के समय बाहर निकलने से बच रहे हैं, पंखे और एसी का इस्तेमाल फरवरी में ही बढ़ गया है। किसानों के लिए भी यह मौसम चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि असामान्य गर्मी फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकती है।
IMD के अनुसार, फिलहाल तापमान में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बादल जरूर आ सकते हैं, लेकिन इससे गर्मी से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
मौसम का यह बदला हुआ मिजाज साफ संकेत दे रहा है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुका है।






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