इंडिया-EU FTA डील: वो शर्त जिसने TESLA की राह को रोक दिया और Tata-Mahindra-Maruti EV को मौका दिया

भारत-यूरोपीयन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में EV पर अलग तरीके से शर्त रखी गई, जिससे विदेशी इलेक्ट्रिक कारों के लिए राहत सीमित और भारतीय कंपनियों के लिए अवसर बढ़ा

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हाल ही में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बनी है, जिसके तहत यूरोप से भारत में आयात होने वाली कारों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को धीरे-धीरे 110% से घटाकर 10% तक लाया जाएगा, लेकिन यह राहत सभी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर लागू नहीं होगी, बल्कि कुछ विशिष्ट कोटा और शर्तों के तहत दी जाएगी।

इस समझौते में EVs के लिए दीर्घकालिक और सीमित कोटा निर्धारित किया गया है — यह शर्त TESLA जैसे विदेशी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को तुरंत भारत में सस्ते में वाहन लाने में मुश्किलें दे सकती है। वहीं, इस संरचना से भारतीय निर्माताओं जैसे Tata Motors, Mahindra & Mahindra और Maruti Suzuki को अपने EVs को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुँच और अवसर मिलने की संभावना है, क्योंकि EU में बने भारतीय EVs पर शुल्क कम होने की व्यवस्था भी शामिल है।

विशेष रूप से, भारत और EU के बीच तय हुए कोटा के अनुसार, 90,000 इलेक्ट्रिक वाहनों को शून्य ड्यूटी के साथ 10 वर्षों में यूरोप में भेजने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि छोटे और कम कीमत वाले EVs के लिए इस प्रक्रिया का विस्तार अगले 14 वर्षों में होगा — यह शर्त भारतीय EV कंपनियों को दीर्घकालिक निर्यात अवसर देती है।

डील के तहत यूरोपीय बाज़ार से भारत में कारों का आयात कोटा भी सालाना 2.5 लाख वाहनों तक सीमित रखा गया है और EVs के लिए यह राहत धीरे-धीरे लागू होगी, जिससे विदेशी कंपनियों को तत्काल लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन भारतीय EV उत्पादकों के लिए यह डील भविष्य में बड़े निर्यात अवसर का मार्ग खोल सकती है।

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